श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से आयोजित एक रैली में लगाए गए एक नारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में हुई इस रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने एक पुराने राजनीतिक नारे को बदले हुए अंदाज में दोहराया, जिसे कश्मीरी महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देखा गया। विवाद बढ़ने के बाद BJP ने नौ लोगों को निलंबित कर दिया और रैली को “अनधिकृत” बताया।
रैली में BJP कार्यकर्ताओं ने “मक्लाव, ऐज़ी हुंड, फ़ैज़ी हुंड इज़्ज़त” जैसा नारा लगाया। कश्मीर की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में ऐज़ी और फ़ैज़ी नाम सिर्फ सामान्य नाम नहीं माने जाते, बल्कि ये मातृत्व और कश्मीरी महिलाओं के प्रतीक के तौर पर भी इस्तेमाल होते रहे हैं। यही वजह है कि नारे के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कहां से आया था यह नारा?
दरअसल, इस विवादित नारे की जड़ें कई दशक पुराने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के चुनावी नारे से जुड़ी हैं। 1977 के विधानसभा चुनावों के दौरान NC ने “ऐज़ी हुंड इज़्ज़त, फ़ैज़ी हुंड इज़्ज़त, दफ़ा 370” का नारा इस्तेमाल किया था। इसका मकसद यह संदेश देना था कि जम्मू-कश्मीर की महिलाओं की इज्जत और क्षेत्र की पहचान अनुच्छेद 370 से जुड़ी हुई है।
यह नारा 1975 में इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला के बीच हुए समझौते के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में सामने आया था। इस समझौते के बाद शेख अब्दुल्ला दो दशक से ज्यादा समय बाद सत्ता में लौटे थे।
BJP पर क्यों उठे सवाल?
BJP लंबे समय से दावा करती रही है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को समान अधिकार और बेहतर संवैधानिक सुरक्षा मिली है। ऐसे में रैली में लगाया गया नारा पार्टी के इसी महिला सशक्तिकरण वाले दावे के विपरीत माना गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने इसे कश्मीर की माताओं और महिलाओं का अपमान बताया। विवाद बढ़ने के बाद BJP ने नौ प्रतिभागियों को निलंबित करते हुए कहा कि कार्यक्रम को जिला इकाई ने मंजूरी नहीं दी थी। हालांकि, रैली में मौजूद BJP नेता सोफी मोहम्मद यूसुफ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
