Sunday, August 9, 2026
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Home खेलपुलवामा के ओवैस ने बुल्गारिया में लहराया जीत का परचम, संघर्षों को पीछे छोड़ बने MMA चैंपियन

पुलवामा के ओवैस ने बुल्गारिया में लहराया जीत का परचम, संघर्षों को पीछे छोड़ बने MMA चैंपियन

by Sagar Sharma
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रहने वाले मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर ओवैस याकूब ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए बुल्गारिया में आयोजित BRAVE CF 107 प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया। आर्थिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ओवैस ने अपने जुनून को नहीं छोड़ा और आज दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

खिताबी मुकाबला जीतने के बाद ओवैस ने उस भावुक पल को याद करते हुए बताया कि बुल्गारिया में उनके साथ परिवार या करीबी दोस्त मौजूद नहीं थे। स्टेडियम में अधिकतर दर्शक स्थानीय खिलाड़ियों का समर्थन कर रहे थे। जीत हासिल करने के बाद उन्होंने कश्मीर से अपने जुड़ाव को महसूस करने के लिए पारंपरिक काराकुली टोपी और कुर्ता पहना।

उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि कश्मीर में उनकी जीत का स्वागत होगा, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट पर लोगों का उत्साह और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की इच्छा उनके लिए बेहद खास अनुभव रही।

28 वर्षीय ओवैस पुलवामा के मूरान कस्बे से ताल्लुक रखते हैं। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण कम उम्र में ही उन पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। पिता की तबीयत खराब होने के बाद परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने कई तरह के काम किए। कभी कैटरिंग में हाथ बंटाया, कभी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम किया, तो कभी बागों में सेब तोड़ने और पैकिंग का काम भी किया। इन सबके बीच उन्होंने मार्शल आर्ट्स का अभ्यास कभी नहीं छोड़ा।

साल 2018 में उन्होंने ‘चैंपियन ऑफ चैंपियंस’ का खिताब जीता और राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ फाइटर का सम्मान भी हासिल किया। इसके बाद उन्हें मशहूर फाइटर खबीब नूरमगोमेदोव की टीम के साथ प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला, जहां उन्होंने अमेरिकन किकबॉक्सिंग एकेडमी में कोच जेवियर मेंडेज के मार्गदर्शन में अपनी तकनीक को और निखारा।

ओवैस ने वर्ष 2015 में पुलवामा में अपनी एमएमए एकेडमी की शुरुआत की थी। अब तक वह 200 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनका मानना है कि खेल युवाओं को सही दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सफलता के बावजूद उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अपेक्षित सम्मान और पहचान न मिलने पर निराशा भी जताई है।

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