Sunday, August 9, 2026
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जंतर-मंतर विवाद पर पीएम मोदी बोले- गालियों से नहीं निकलता समाधान, युवाओं को सजा नहीं सही दिशा दें

by Sagar Sharma
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों पर उन्होंने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गाली-गलौज किसी भी समस्या का हल नहीं है और समाज को भटके हुए युवाओं को दंडित करने के बजाय उन्हें सही मार्ग दिखाने का प्रयास करना चाहिए।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने देखा। उनके अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो किसी भी सभ्य समाज के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।पीएम मोदी ने कहा कि युवावस्था में गलतियां होना असामान्य नहीं है। उनका मानना है कि यही वह समय होता है जब व्यक्ति अपनी भूलों को समझकर उन्हें सुधार सकता है।

उन्होंने कहा कि समाज में नाराजगी हो सकती है, लेकिन ऐसे युवाओं को अपनाकर उन्हें सही दिशा देना अधिक आवश्यक है।प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में गुस्से या बदले की भावना से कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अदालतों के चक्कर लगवाने और कानूनी परेशानियां बढ़ाने से हालात नहीं बदलेंगे। इसके बजाय समाज को ऐसे युवाओं को समझाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने की जरूरत है।उन्होंने कहा, “मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं और समाज से भी यही अपील करता हूं कि वे क्षमा का रास्ता अपनाएं। गालियां कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होतीं। आइए, जो लोग भटक गए हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाएं और मिलकर भारत के लिए काम करें।”यह मामला 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर कथित पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर 25 वर्षीय एक महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे बाद में आगे की जांच के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने को स्थानांतरित कर दिया गया।वहीं, प्रदर्शन का आयोजन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि किसी ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है तो उसके लिए मानहानि का रास्ता अपनाया जा सकता है, लेकिन केवल शब्दों के आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है।

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