लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का संदेश दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जापानी निवेशकों का जिक्र करते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश में मौजूद अवसरों का लाभ जरूर उठाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के लिए UP-Japan Investment Meet 2026 का आयोजन किया जा रहा है।
जापानी कंपनियों के साथ निवेश पर जोर
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित इस निवेश कार्यक्रम का उद्देश्य जापान की कंपनियों को प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना है। कार्यक्रम में जापान के 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधियों, सीईओ और उद्योग जगत से जुड़े लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों की रुचि को वास्तविक परियोजनाओं, तकनीकी साझेदारी और रोजगार के अवसरों में बदला जाए।
19 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली हाई-लेवल CEO राउंडटेबल बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जापानी उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ निवेश के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा करने वाले हैं। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
इन क्षेत्रों में निवेश की उम्मीद
उत्तर प्रदेश सरकार जापान से खास तौर पर सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर जोर दे रही है। सरकार का व्यापक लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक बड़े विनिर्माण और तकनीकी निवेश केंद्र के रूप में विकसित करना है।
सरकार के अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि, कुशल मानव संसाधन, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे कारक उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं। इन सुविधाओं के जरिए विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करने और विस्तार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
जापान से पहले भी मिल चुका है बड़ा निवेश प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश संबंधों को मजबूत करने की कोशिश नई नहीं है। फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा के दौरान जापानी कंपनियों के साथ करीब 11,000 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन समझौतों में कृषि उपकरण, औद्योगिक मशीनरी, जल एवं पर्यावरण संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल थे।
उत्तर प्रदेश सरकार के निवेश प्रोत्साहन विभाग के मुताबिक, सिंगापुर और जापान से किए गए वैश्विक निवेश संपर्क अभियान के माध्यम से कुल 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश MoU हासिल किए गए, जिनमें जापान से करीब 90,000 करोड़ रुपये के समझौते शामिल हैं।
रोजगार और औद्योगिक विकास पर नजर
जापानी निवेश को उत्तर प्रदेश के लिए केवल पूंजी निवेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार का फोकस नई औद्योगिक इकाइयों के साथ रोजगार, तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी है। जापानी कंपनियों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल प्रदेश में आधुनिक विनिर्माण और तकनीकी क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में जापानी निवेशकों के साथ बढ़ती बातचीत प्रदेश के औद्योगिक विकास और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि निवेश बैठकों में हुई बातचीत कितनी परियोजनाओं में बदलती है और उनका जमीन पर कितना असर दिखाई देता है।
