अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े कुछ अहम प्रावधानों को फिलहाल रोक दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिकी कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था। ट्रंप ने इस कदम के पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को वजह बताया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर पहले से लागू सभी टैरिफ खत्म कर दिए गए हैं।
रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का खतरा क्यों था?
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए युद्ध के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा। रूसी तेल कई बार दूसरे विकल्पों की तुलना में रियायती कीमतों पर उपलब्ध रहा, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को लाभ मिला और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिली।
हालांकि, अमेरिका रूस की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करने के लिए लगातार आर्थिक दबाव बढ़ाता रहा है। इसी रणनीति के तहत सितंबर 2026 में लागू किए गए नए अमेरिकी कानून ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगाने का रास्ता खोला था। भारत भी इस संभावित कार्रवाई से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल था।
ट्रंप ने किन प्रतिबंधों पर दी छूट?
ट्रंप ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के तहत कुछ प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने पर छूट दी है। इस कानून का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसके ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों को अतिरिक्त लागत का सामना करने के लिए बाध्य करना था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल इन प्रावधानों को लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यह छूट केवल भारत के लिए अलग से घोषित राहत नहीं है, बल्कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले अन्य प्रमुख देशों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
हालांकि, यह फैसला स्थायी रूप से प्रतिबंधों को समाप्त नहीं करता। अमेरिकी प्रशासन भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर संबंधित उपाय दोबारा लागू कर सकता है।
क्या भारत पर टैरिफ अब कम हो जाएगा?
इस फैसले से भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण नए 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा कम हुआ है। इससे भारतीय निर्यातकों को भी संभावित राहत मिल सकती है, क्योंकि भारी अमेरिकी शुल्क भारतीय सामानों को अमेरिकी बाजार में महंगा बना सकते थे।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। रूस से तेल खरीदने के कारण नए टैरिफ का खतरा टलना और भारत पर पहले से लागू अमेरिकी टैरिफ में कटौती होना दो अलग-अलग बातें हैं।
फरवरी 2026 में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाने की बात सामने आई थी। अक्टूबर का नया फैसला रूस से ऊर्जा खरीद पर आधारित अतिरिक्त कार्रवाई से संबंधित है। इसलिए कुल टैरिफ में किसी और कटौती की पुष्टि के लिए अलग आधिकारिक घोषणा जरूरी होगी।
भारत की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति में होने वाले बदलाव का असर देश के आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर पड़ सकता है।
यदि भारत को रूस से तेल खरीदने के मामले में अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क का सामना नहीं करना पड़ता, तो भारतीय रिफाइनरियों और निर्यात कारोबार पर संभावित दबाव कम हो सकता है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में तत्काल कमी होना निश्चित नहीं है, क्योंकि खुदरा कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, कर, विनिमय दर और अन्य लागतों का भी प्रभाव पड़ता है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी रहेगी नजर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की बातचीत भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले उचित बाजार पहुंच और टैरिफ संबंधी स्पष्टता मिले।
ट्रंप का ताजा फैसला दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव कम करने का अवसर दे सकता है, लेकिन रूस से तेल खरीद, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार शर्तों जैसे मुद्दे आगे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
निष्कर्ष: ट्रंप के फैसले से भारत को रूस से तेल खरीदने के कारण नए भारी टैरिफ का सामना करने के खतरे से फिलहाल राहत मिली है। लेकिन इसे सभी अमेरिकी टैरिफ की समाप्ति या भविष्य में किसी भी प्रतिबंध के न लगने की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
