Wednesday, October 28, 2026
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श्रीधर वेम्बु का AI पर बड़ा बयान: कोडिंग तेज हुई, लेकिन 10 गुना प्रोडक्टिविटी का लक्ष्य अभी दूर

by Rohan Gupta
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नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोडिंग की प्रक्रिया को तेज जरूर किया है, लेकिन इससे उत्पादकता में अभी तक 10 गुना या 100 गुना की बढ़ोतरी नहीं हुई है। Zoho के संस्थापक और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बु ने AI के मौजूदा प्रभाव पर यह बात कही है। उनके मुताबिक, AI से प्रोटोटाइप बनाना पहले की तुलना में काफी तेज हुआ है, लेकिन किसी सॉफ्टवेयर को पूरी तरह तैयार करने में अभी भी काफी मानवीय मेहनत लगती है।

AI से उत्पादकता में 25 से 50 फीसदी तक सुधार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने विचारों में वेम्बु ने कहा कि फिलहाल AI आधारित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से उत्पादकता में लगभग 25 से 50 फीसदी तक सुधार का अनुमान है। उन्होंने यह आकलन पूरे प्रोडक्ट डेवलपमेंट प्रोसेस के आधार पर बताया, न कि केवल कोड लिखने की गति के आधार पर।

वेम्बु के अनुसार, शुरुआती प्रोटोटाइप तैयार करने में AI काफी मददगार साबित हो रहा है। हालांकि, किसी प्रोडक्ट को इस्तेमाल के लिए तैयार करने, उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बाकी जरूरी काम पूरे करने में इंसानी भागीदारी अब भी महत्वपूर्ण है।

भविष्य में 10 या 100 गुना बढ़ सकती है उत्पादकता

वेम्बु का मानना है कि आने वाले समय में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की उत्पादकता में बहुत बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने 10 गुना या 100 गुना तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई, लेकिन स्पष्ट किया कि यह स्तर अभी हासिल नहीं हुआ है।

उन्होंने इस संभावित बदलाव को गणितीय तरीकों और कोड के औपचारिक सत्यापन (Formal Verification) में हो रही प्रगति से जोड़ा है। इस प्रक्रिया में AI द्वारा तैयार किए गए कोड या गणितीय प्रमाणों को एक औपचारिक सिस्टम के जरिए जांचा जा सकता है। उन्नत AI मॉडल और सत्यापन प्रणालियों के बीच लगातार फीडबैक से अधिक भरोसेमंद सॉफ्टवेयर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

AI से बढ़ रही हैं सॉफ्टवेयर कंपनियों की लागत

वेम्बु ने AI के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ी लागत पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, कंपनियों को कई तरह के खर्चों का सामना करना पड़ रहा है।

इनमें सर्वर, मेमोरी और हार्डवेयर की बढ़ती कीमतें, इंजीनियरों द्वारा AI टूल इस्तेमाल करने पर होने वाला खर्च और ओपन-वेट AI मॉडल चलाने के लिए महंगे GPU की जरूरत शामिल हैं। उन्होंने कहा कि AI से मिलने वाले उत्पादकता लाभ के साथ इन बढ़ती लागतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सॉफ्टवेयर नौकरियों पर क्यों पड़ सकता है असर?

AI टूल्स कोडिंग के कई काम तेजी से कर सकते हैं। इससे डेवलपर्स की कार्यशैली और कंपनियों की जरूरतों में बदलाव आने की संभावना है। वहीं, जब तक AI पूरे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट चक्र में बड़े पैमाने पर उत्पादकता नहीं बढ़ाता, तब तक इसके फायदे और खर्च के बीच संतुलन बनाना कंपनियों के लिए अहम रहेगा।

वेम्बु ने इन तकनीकी और आर्थिक बदलावों के बीच सॉफ्टवेयर उद्योग में नए तरीकों से काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। हालांकि, AI का रोजगार पर वास्तविक असर कंपनी, काम की प्रकृति और तकनीक को अपनाने के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

AI का अगला दौर कितना बड़ा बदलाव लाएगा?

श्रीधर वेम्बु की टिप्पणी AI को लेकर चल रही बहस के एक अहम पहलू को सामने रखती है। कोड तेजी से लिख पाना और पूरे सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को बेहतर, सुरक्षित और उपयोगी बनाना अलग-अलग चुनौतियां हैं। आने वाले समय में AI की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि वह विकास की पूरी प्रक्रिया में कितनी उत्पादकता बढ़ाता है और इस दौरान लागत व गुणवत्ता के बीच कितना बेहतर संतुलन बन पाता है।

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