कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वर्ष 2029 में केंद्र की सत्ता में आती है, तो स्कूलों के पाठ्यक्रम में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को शामिल किया जाएगा। नेता ने लोगों से 2029 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर देने की अपील भी की।
नेता के इस बयान के बाद शिक्षा और राजनीति, दोनों क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ नेहरू द्वारा लिखी गई चर्चित पुस्तक है, जिसमें भारत के इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और सामाजिक विकास को समझने का प्रयास किया गया है। यह पुस्तक भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिखी गई थी और भारतीय इतिहास को लेकर नेहरू के दृष्टिकोण को सामने रखती है।
कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में कहा कि देश की नई पीढ़ी को भारत के इतिहास और उसकी विविध सांस्कृतिक विरासत के बारे में व्यापक जानकारी मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, नेहरू की इस पुस्तक में भारत की सभ्यता और उसके विकास को समझने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलू मौजूद हैं। इसी वजह से इसे स्कूलों में विद्यार्थियों के अध्ययन का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस की संभावना भी बढ़ गई है। शिक्षा के पाठ्यक्रम में किसी ऐतिहासिक या राजनीतिक व्यक्तित्व की पुस्तक को अनिवार्य करने का फैसला हमेशा चर्चा का विषय रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दल और इतिहासकार इतिहास पढ़ाने के तरीके और पाठ्यक्रम में शामिल सामग्री को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान को केवल शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आगामी लोकसभा चुनाव से भी जोड़ा। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वर्ष 2029 में कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका दिया जाए, ताकि पार्टी अपनी बताई गई नीतियों को लागू कर सके।
द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई थी और बाद में इसका विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ। पुस्तक में प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक दौर तक देश के इतिहास और विचार पर चर्चा की गई है। इसमें भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक परिस्थितियों जैसे विषयों को भी व्यापक रूप से जगह दी गई है।
अब इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में इस पुस्तक को स्कूल शिक्षा के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा या नहीं। फिलहाल यह कांग्रेस नेता की ओर से व्यक्त किया गया राजनीतिक और नीतिगत प्रस्ताव है। 2029 के चुनाव और उसके बाद बनने वाली सरकार की नीतियों पर ही यह तय होगा कि ऐसे प्रस्तावों को वास्तविक रूप से लागू किया जाता है या नहीं।
