NEET UG काउंसलिंग में कटऑफ को लेकर नया ट्रेंड
NEET UG के जरिए MBBS में दाखिले को लेकर इस बार कटऑफ में दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। जहां मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अंकों को लेकर छात्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है, वहीं 462 अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को भी MBBS सीट मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे मेडिकल प्रवेश की कटऑफ और रैंक को लेकर छात्रों की दिलचस्पी बढ़ गई है
462 अंकों पर मिली MBBS सीट
काउंसलिंग के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 462 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को MBBS की सीट मिल गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल स्कोर ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की कैटेगरी, कॉलेज की उपलब्ध सीटें, काउंसलिंग राउंड और उस वर्ष की प्रतिस्पर्धा भी दाखिले के परिणाम को प्रभावित करती है।
NEET में कुछ अंकों का अंतर कई बार रैंक में बड़ा बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि समान या आसपास के स्कोर वाले उम्मीदवारों की कॉलेज चॉइस और सीट मिलने की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
ओपन कैटेगरी में 60 रैंक का अंतर
इस बार ओपन कैटेगरी में भी रैंक को लेकर करीब 60 रैंक का अंतर देखने को मिला है। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए केवल अपने NEET स्कोर पर निर्भर रहने के बजाय काउंसलिंग के दौरान उपलब्ध विकल्पों और सीट मैट्रिक्स पर नजर रखना जरूरी हो जाता है।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
NEET UG में हर साल कटऑफ कई कारणों से ऊपर-नीचे होती है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों की संख्या, पेपर का स्तर, उपलब्ध MBBS सीटें और काउंसलिंग प्रक्रिया इसके प्रमुख कारक हैं। इसलिए किसी एक साल की कटऑफ को अगले साल के लिए निश्चित मानना सही नहीं होता।
