अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को दिल्ली की अदालत से बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच का सामना कर रहे वैनडाइक को एक महीने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी गई, जिसके बाद वह शुक्रवार शाम वॉशिंगटन के लिए रवाना हो गया। उसके साथ मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों को भी अपने-अपने देश जाने की अनुमति मिली है। हालांकि, यह राहत मामले की जांच खत्म होने का संकेत नहीं है। NIA की UAPA से जुड़ी जांच अभी जारी है।
NIA ने भारत में रोकने पर नहीं दिया जोर
अदालत में सुनवाई के दौरान NIA की ओर से यह दलील नहीं दी गई कि जांच पूरी करने के लिए वैनडाइक और अन्य आरोपियों की तत्काल भारत में मौजूदगी जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी
अदालत ने शर्त रखी है कि जरूरत पड़ने पर सभी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होंगे। इसके अलावा उन्हें अपना आवासीय पता, फोन नंबर और ईमेल जैसी संपर्क जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। वैनडाइक ने 21 अक्टूबर को भारत लौटने की फ्लाइट भी बुक की है।
ड्रोन ट्रेनिंग से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला मार्च 2026 में सामने आया था, जब NIA ने वैनडाइक समेत छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप था कि आरोपियों ने म्यांमार में मौजूद जातीय सशस्त्र समूहों के सदस्यों को करीब तीन महीने तक ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग तकनीक से जुड़ी ट्रेनिंग दी।
NIA ने यह भी आरोप लगाया था कि इस गतिविधि के लिए म्यांमार स्थित कुछ सशस्त्र समूहों से लॉजिस्टिक सहायता मिली थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले के तार म्यांमार में सक्रिय समूहों और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा पहलुओं तक पहुंचते हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
इमिग्रेशन कानून के मामले में पहले मिली राहत
सितंबर में NIA ने वैनडाइक और अन्य आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस ने प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इस प्रक्रिया के बाद उन्हें इस कानून से जुड़े मामले में डिस्चार्ज किया गया और डिफॉल्ट बेल मिली।
इसके बावजूद UAPA से जुड़ी जांच को बंद नहीं किया गया है। यही वजह है कि अदालत की अनुमति के बावजूद वैनडाइक और अन्य आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा।
म्यांमार से सबूत जुटाना बना बड़ी चुनौती
मामले में जांच की एक अहम चुनौती यह है कि जिन कथित गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई म्यांमार में होने का आरोप है। ऐसे में वहां से संबंधित सबूत हासिल करना जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अदालत के समक्ष भी यह स्पष्ट किया गया कि UAPA जांच को पूरा होने में समय लग सकता है। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी को निश्चित समयसीमा के भीतर जांच समाप्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब एजेंसी ने आरोपियों की तत्काल भारत में भौतिक मौजूदगी को जरूरी नहीं बताया हो।
छह यूक्रेनी नागरिक भी लौटे अपने देश
वैनडाइक के साथ गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों को भी एक महीने के लिए भारत से बाहर जाने की अनुमति मिली है। इन सभी पर भी मामले से जुड़े आरोप लगाए गए थे और इन्हें भारत में जांच का सामना करना पड़ा।
अब अदालत द्वारा तय शर्तों के तहत सभी आरोपियों को जरूरत पड़ने पर जांच में सहयोग करना होगा। इससे साफ है कि विदेश जाने की अनुमति को मामले से पूर्ण मुक्ति नहीं माना गया है।
फिलहाल वैनडाइक अमेरिका पहुंच चुका है, जबकि NIA की जांच आगे जारी रहने वाली है। आने वाले समय में म्यांमार से जुटाए जाने वाले सबूत, जांच की प्रगति और अदालत में पेश की जाने वाली सामग्री इस मामले की अगली दिशा तय करेगी।
