Sunday, September 13, 2026
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मणिपुर में NRC-जनगणना के विरोध ने पकड़ा उग्र रूप, मशाल मार्च में पथराव; पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

by Sagar Sharma
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मणिपुर के काकचिंग जिले में रविवार रात राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर निकाला गया मशाल जुलूस तनाव और हिंसा में बदल गया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिस पर कथित तौर पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई आंसू गैस के गोले छोड़े। अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं।

करीब तीन किलोमीटर लंबा था मशाल मार्च

वाबागई, हियांगलाम और आसपास के इलाकों से सैकड़ों ग्रामीण इस विरोध मार्च में शामिल हुए थे। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारी ‘नो NRC, नो Census’ के नारे लगा रहे थे।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले NRC को अपडेट किया जाए। इसके अलावा वे जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों यानी IDPs के पुनर्वास और पुनर्स्थापन से पहले जनगणना कराने का भी विरोध कर रहे थे।

पुलिस ने कहां रोका प्रदर्शन?

जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारी काकचिंग जिला मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे। जब मार्च कीराक बांध क्षेत्र के पास पहुंचा तो पुलिस ने रास्ता रोक दिया और प्रदर्शनकारियों से वापस लौटने को कहा।

शुरुआत में स्थिति नियंत्रण में थी, लेकिन कुछ समय बाद माहौल बिगड़ गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

कुछ प्रदर्शनकारियों को लगी चोट

पथराव और पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखी।

पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित रखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए, क्योंकि NRC और जनगणना का मुद्दा मणिपुर में बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

NRC को जनगणना से पहले अपडेट करने की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जनगणना से पहले NRC को अपडेट किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि राज्य में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष के कारण हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हैं। ऐसे में पहले विस्थापित लोगों के पुनर्वास और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड को स्पष्ट किया जाए और उसके बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

मणिपुर में पिछले कुछ दिनों से ‘No NRC, No Census’ अभियान के तहत अलग-अलग इलाकों में रैलियां, धरने और मशाल मार्च आयोजित किए जा रहे हैं।

2023 से जारी है जातीय संघर्ष

मणिपुर की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए 2023 से जारी जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। मई 2023 से राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष के कारण 260 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है।

इसी विस्थापन को लेकर प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि प्रभावित परिवारों को दोबारा बसाने के बाद ही जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उनका मानना है कि इससे जनगणना के आंकड़ों की वास्तविकता और विश्वसनीयता बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार से बातचीत की मांग भी

NRC को लेकर राज्य में आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने लोगों से बंद और हिंसक गतिविधियों से बचने तथा अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की अपील की है। सरकार की ओर से शांति बनाए रखने और मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल काकचिंग में मशाल मार्च के हिंसक होने के बाद प्रशासन सतर्क है। NRC और आगामी जनगणना को लेकर मणिपुर में विरोध का सिलसिला आगे कितना बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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