Tuesday, November 3, 2026
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धनतेरस पर लक्ष्मी प्रतिमा खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान, जानें खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति को लेकर क्या है मान्यता

by Sagar Sharma
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धनतेरस 2026: दीपावली से पहले आने वाला धनतेरस हिंदू धर्म में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। लोग सोना, चांदी, बर्तन और घर की सजावट से जुड़ी शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। इसी अवसर पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। खासतौर पर लक्ष्मी माता की खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ऐसी मूर्ति घर में लाना शुभ माना जाता है या नहीं।

धार्मिक परंपराओं और वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदते समय उनकी मुद्रा, स्वरूप और पूजा के स्थान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना चाहिए, न कि धन प्राप्ति की निश्चित गारंटी के तौर पर।

बैठी हुई लक्ष्मी प्रतिमा को क्यों माना जाता है शुभ?

हिंदू धार्मिक परंपरा में माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनकी प्रतिमा में कमल पर विराजमान स्वरूप विशेष रूप से लोकप्रिय है।कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में माता लक्ष्मी की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है। इसे स्थिरता, शांति और घर में समृद्धि बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

माता लक्ष्मी की बैठी हुई प्रतिमा पूजा के लिए आसानी से स्थापित की जा सकती है। भक्त इस स्वरूप में देवी की आराधना करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना करते हैं।हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि माता लक्ष्मी की अन्य मुद्राओं वाली प्रतिमाएं अशुभ होती हैं। प्रतिमा के स्वरूप को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं हो सकती हैं।

क्या खड़ी मुद्रा वाली लक्ष्मी प्रतिमा घर में नहीं लानी चाहिए?

माता लक्ष्मी की खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को लेकर कुछ वास्तु और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनके अनुसार, खड़ी मुद्रा में देवी को गतिशीलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि बैठी हुई मुद्रा स्थिरता और शांति से जुड़ी होती है।इसी वजह से कुछ लोग घर के पूजा स्थल के लिए बैठी हुई लक्ष्मी प्रतिमा को प्राथमिकता देते हैं।

हालांकि, खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को घर में लाने से बरकत रुक जाती है या धन की कमी होने लगती है, ऐसी बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में भी देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की परंपरा मौजूद है।इसलिए प्रतिमा खरीदते समय केवल किसी डर या अफवाह के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। अपनी पूजा परंपरा, पसंद और घर में उपलब्ध स्थान के अनुसार प्रतिमा चुनना बेहतर है।

धनतेरस पर लक्ष्मी प्रतिमा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदने से पहले कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

1. प्रतिमा का स्वरूप: माता लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा चुनें, जिसमें देवी का स्वरूप स्पष्ट, सुंदर और श्रद्धापूर्ण हो। कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का स्वरूप घरों में विशेष रूप से लोकप्रिय है।

2. प्रतिमा की गुणवत्ता: प्रतिमा खरीदते समय उसकी बनावट, सामग्री और मजबूती जांचें। टूटी हुई या क्षतिग्रस्त प्रतिमा खरीदने से बचें।

3. पूजा स्थल का ध्यान रखें: घर के मंदिर में प्रतिमा स्थापित करने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। पूजा स्थल साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

4. अनावश्यक दिखावे से बचें: माता लक्ष्मी की पूजा श्रद्धा और भक्ति से जुड़ी है। महंगी प्रतिमा खरीदना आवश्यक नहीं है। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार प्रतिमा खरीदना उचित है।

5. धार्मिक मान्यताओं को समझें: प्रतिमा की मुद्रा या दिशा को लेकर अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं। अपने परिवार की पूजा पद्धति के अनुसार निर्णय लें।

माता लक्ष्मी की पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी की पूजा में स्वच्छता, सकारात्मक सोच और अच्छे आचरण को महत्वपूर्ण माना जाता है।धनतेरस के दिन घर की सफाई करना, पूजा स्थल को व्यवस्थित रखना और दीपक जलाना शुभ परंपराओं में शामिल है। भक्त माता लक्ष्मी से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।माता लक्ष्मी की पूजा केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं मानी जाती। धार्मिक दृष्टिकोण से इसका संबंध परिवार की खुशहाली, संतोष, अच्छे व्यवहार और जीवन में सकारात्मकता से भी है।

धनतेरस 2026 कब मनाया जाएगा?

वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन लोग पारंपरिक रूप से सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है।

पूजा का शुभ समय स्थानीय पंचांग और शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग में मुहूर्त की जानकारी देखना उचित रहेगा।

निष्कर्ष: धनतेरस पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदते समय खड़ी या बैठी मुद्रा को लेकर डरने की आवश्यकता नहीं है। बैठी हुई प्रतिमा को स्थिरता का प्रतीक मानने की परंपरा प्रचलित है, लेकिन खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को अशुभ मानकर बरकत रुकने का दावा प्रमाणित नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक पूजा परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी की प्रतिमा चुनें और धनतेरस का पर्व खुशी तथा सकारात्मकता के साथ मनाएं।

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