रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में हवाई हमलों से बचाव को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने यूक्रेन को 500 पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर यानी लगभग 18,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका हथियारों की बिक्री करेगा, लेकिन इनके भुगतान के लिए अमेरिकी सरकार अपने बजट से पैसा खर्च नहीं करेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यूक्रेन को मिलने वाली इन मिसाइलों का खर्च कौन उठाएगा और क्या इन्हें युद्ध के बीच समय पर पहुंचाया जा सकेगा?
500 पैट्रियट मिसाइलों की बिक्री को अमेरिकी मंजूरी
अमेरिकी विदेश विभाग ने यूक्रेन के लिए 500 पैट्रियट PAC-3 MSE इंटरसेप्टर मिसाइलों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब यूक्रेन लगातार रूस की मिसाइलों और हवाई हमलों का सामना कर रहा है।
पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी मदद से दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने की कोशिश की जाती है। रूस की ओर से ऊर्जा संयंत्रों, सैन्य ठिकानों और शहरी क्षेत्रों पर हमलों के बीच यूक्रेन के लिए इन मिसाइलों की जरूरत बढ़ गई है।
इस प्रस्तावित सौदे में लॉकहीड मार्टिन प्रमुख ठेकेदार होगा। कंपनी इन मिसाइलों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ी भूमिका निभाएगी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस बिक्री से यूक्रेन की रक्षा क्षमता मजबूत होगी और यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था को समर्थन मिलेगा।
अमेरिका हथियार देगा, लेकिन भुगतान नहीं करेगा
इस सौदे की सबसे खास बात इसकी वित्तीय व्यवस्था है। अमेरिका ने मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दी है, लेकिन इनकी खरीद के लिए अमेरिकी सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।यूक्रेन को इन हथियारों के भुगतान के लिए दूसरे देशों की आर्थिक सहायता पर निर्भर रहना होगा। कनाडा, जर्मनी और नॉर्वे इस खरीद के लिए वित्तीय योगदान करेंगे। इसके अलावा, यूरोपीय संघ की सहायता से मिलने वाली यूक्रेन की वित्तीय व्यवस्था भी इस भुगतान में भूमिका निभाएगी।
मिसाइलों की खरीद NATO से जुड़े JUMPSTART कार्यक्रम के माध्यम से सहयोगी देशों के योगदान से आगे बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका हथियार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में शामिल रहेगा, जबकि आर्थिक बोझ सहयोगी देशों और यूक्रेन की सहायता के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर रहेगा।
इसका अर्थ है कि अमेरिका हथियारों की बिक्री से जुड़ी मंजूरी देगा, लेकिन सीधे अपने सरकारी बजट से इस खरीद का भुगतान नहीं करेगा।
यूक्रेन को तुरंत नहीं मिलेंगी मिसाइलें
हालांकि बिक्री को मंजूरी मिलना यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 500 मिसाइलें तुरंत पहुंच जाएंगी।रिपोर्टों के अनुसार, इन इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण अभी बाकी है और उनकी आपूर्ति में लंबा समय लग सकता है। मौजूदा उत्पादन क्षमता और पहले से जारी सैन्य जरूरतों को देखते हुए कुछ मिसाइलों की डिलीवरी 2030 के दशक की शुरुआत तक खिंच सकती है।
यूक्रेन के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि देश को मौजूदा युद्ध के दौरान ही एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अतिरिक्त गोला-बारूद की जरूरत है।यूक्रेन की मांग है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिसाइलों की आपूर्ति में तेजी लाएं। इसके लिए अमेरिकी भंडार से कुछ मिसाइलें उपलब्ध कराने और बाद में उनकी भरपाई करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
रूस के हमलों के बीच यूक्रेन की बढ़ी चिंता
यूक्रेन लगातार रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। खासतौर पर ऊर्जा ढांचे और नागरिक क्षेत्रों पर हमलों ने देश की सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा दिया है।पैट्रियट सिस्टम यूक्रेन को लंबी दूरी और बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव में मदद करता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता उपलब्ध इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या पर भी निर्भर करती है।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले भी अमेरिका से मिसाइलों की आपूर्ति में तेजी लाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि देश को अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त हथियारों की आवश्यकता है।अमेरिका और यूक्रेन के बीच हथियारों की आपूर्ति को लेकर हाल के दिनों में बातचीत और तनाव दोनों देखने को मिले हैं। ऐसे में नई मंजूरी दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका के सामने भी उत्पादन की चुनौती
पैट्रियट मिसाइलों की मांग केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को भी अपनी रक्षा जरूरतों के लिए इन मिसाइलों की आवश्यकता है।मध्य पूर्व में जारी सैन्य गतिविधियों और विभिन्न देशों को हथियारों की आपूर्ति के कारण अमेरिकी मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया है।
लॉकहीड मार्टिन की ओर से मिसाइल उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन नई मिसाइलों का निर्माण समय लेने वाली प्रक्रिया है। यही वजह है कि यूक्रेन को मंजूर किए गए हथियारों की तत्काल आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
500 पैट्रियट मिसाइलों की संभावित बिक्री को मंजूरी मिलने से यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था को भविष्य में महत्वपूर्ण समर्थन मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि मिसाइलों का निर्माण कितनी तेजी से होता है और सहयोगी देश भुगतान के लिए कितनी सहायता उपलब्ध कराते हैं।फिलहाल अमेरिका की मंजूरी के बाद आर्थिक योगदान, उत्पादन क्षमता और डिलीवरी की समयसीमा इस सौदे के सबसे अहम पहलू बने हुए हैं।
यूक्रेन के लिए यह फैसला राहत की खबर जरूर है, लेकिन युद्ध के बीच उसे इन मिसाइलों की जरूरत जल्द है। ऐसे में आने वाले महीनों में अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों की भूमिका यह तय करेगी कि यह रक्षा सहायता कितनी जल्दी जमीन पर प्रभाव दिखा पाती है।
