अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के पहले बैच के चार साल पूरे होने के साथ उनके भविष्य और सेवा के बाद रोजगार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को प्रदर्शन, संगठन की जरूरत और निर्धारित मानकों के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में शामिल किया जा सकता है। बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सैन्य सेवा से बाहर निकलकर नागरिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने होंगे।
फिलहाल 25 प्रतिशत तक स्थायी सेवा का प्रावधान
अग्निपथ योजना की शुरुआत के समय सरकार ने स्पष्ट किया था कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जाएगा। चयन उनके चार साल के प्रदर्शन और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर होगा।
इसका मतलब यह है कि चार साल की सेवा पूरी करना अपने आप में स्थायी सैन्य नौकरी की गारंटी नहीं देता। नियमित सेवा के लिए चयन अलग प्रक्रिया और उपलब्ध पदों की जरूरत के अनुसार किया जाता है।
हालांकि, 2026 में सशस्त्र बलों की ओर से इस रिटेंशन सीमा को बढ़ाने की मांग या प्रस्ताव की खबरें सामने आई हैं। सेना, नौसेना और वायुसेना में इस सीमा में बदलाव को लेकर चर्चा हुई है, लेकिन जब तक औपचारिक निर्णय नहीं होता, मौजूदा 25 प्रतिशत वाला प्रावधान ही लागू माना जाएगा।
बाकी 75 प्रतिशत के लिए रोजगार पर जोर
सरकार का एक बड़ा फोकस उन अग्निवीरों को चार साल की सैन्य सेवा के बाद नागरिक क्षेत्र में रोजगार दिलाने पर है, जिन्हें नियमित सैन्य सेवा में जगह नहीं मिलेगी। चार साल की सैन्य ट्रेनिंग के दौरान अग्निवीरों को तकनीकी कौशल, अनुशासन, टीमवर्क और विभिन्न क्षेत्रों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। इन्हीं क्षमताओं को नागरिक रोजगार के लिए उपयोगी बनाने की कोशिश की जा रही है।
केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से पूर्व अग्निवीरों के लिए अलग-अलग रोजगार अवसर और आरक्षण की व्यवस्थाएं भी सामने आई हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और आयु सीमा में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं।
रेलवे समेत कई क्षेत्रों में अवसर
पूर्व अग्निवीरों के लिए सैन्य सेवा के बाद रोजगार के विकल्प बढ़ाने की दिशा में रेलवे समेत कई नागरिक क्षेत्रों के साथ समन्वय की पहल की गई है। इसका उद्देश्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं को उपलब्ध रोजगार अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद करना है।
कुछ राज्यों ने पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण या रोजगार संबंधी प्रावधान किए हैं। इससे चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद युवाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में नए रास्ते खुल सकते हैं।
‘100 प्रतिशत जॉब’ की तैयारी का क्या मतलब?
‘शत-प्रतिशत जॉब की तैयारी’ का अर्थ यह नहीं है कि चार साल बाद हर अग्निवीर को सरकारी स्थायी नौकरी दी जाएगी। इसका मतलब सेवा के दौरान और उसके बाद ऐसी ट्रेनिंग, कौशल विकास और रोजगार सहायता उपलब्ध कराना है, जिससे सैन्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं के पास नागरिक क्षेत्र में रोजगार के ज्यादा विकल्प हों।
पहले बैच के चार साल पूरे होने के साथ अब इस व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा भी शुरू हो रही है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि कितने अग्निवीर नियमित सैन्य सेवा में शामिल होते हैं और कितनों को नागरिक क्षेत्र में रोजगार मिलता है।
फिलहाल आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में रखा जा सकता है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत के लिए सेवा के बाद रोजगार और पुनर्वास के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाने को लेकर भविष्य में कोई औपचारिक निर्णय होता है तो व्यवस्था में बदलाव संभव है।
