Thursday, October 8, 2026
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पाकिस्तान की एयरस्पेस मंजूरी से अटका रूस का परमाणु ईंधन, बांग्लादेश की रूपपुर परियोजना की डिलीवरी टली

by Sagar Sharma
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बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए रूस से आने वाले परमाणु ईंधन की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो सकी। बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, रूस से परमाणु ईंधन लेकर आने वाली कार्गो फ्लाइट को पाकिस्तान के एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं मिली, जिसके कारण 24 सितंबर को होने वाली डिलीवरी टालनी पड़ी। अब नई समय-सारणी के तहत ईंधन की आपूर्ति अक्टूबर से शुरू होने की बात कही गई है।

एक मंजूरी ने बदल दिया पूरा फ्लाइट शेड्यूल

रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए ईंधन लेकर आने वाली उड़ान को कई देशों के एयरस्पेस से होकर गुजरना था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संभावित मार्ग में कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, पाकिस्तान और भारत जैसे देश शामिल थे। ऐसे मार्ग में किसी एक देश की ओवरफ्लाइट मंजूरी नहीं मिलने पर पूरी उड़ान प्रभावित हो सकती है।

बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनम के अनुसार, पाकिस्तान की मंजूरी नहीं मिलने के कारण 24 सितंबर की प्रस्तावित उड़ान आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा मंजूरी नहीं दिए जाने की सटीक वजह उस समय स्पष्ट नहीं थी।

रूस ने अक्टूबर से नई डिलीवरी का दिया कार्यक्रम

डिलीवरी रुकने के बाद रूस की परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम ने नए कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके अनुसार रूपपुर संयंत्र की दूसरी यूनिट के लिए परमाणु ईंधन की आपूर्ति अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2026 के बीच कई उड़ानों के जरिए पूरी की जाएगी।इससे संकेत मिलता है कि एयरस्पेस संबंधी समस्या के कारण शेड्यूल में बदलाव हुआ है, लेकिन परियोजना के लिए ईंधन की पूरी आपूर्ति रोकने की कोई घोषणा नहीं हुई है।

रूपपुर प्लांट क्यों है बांग्लादेश के लिए अहम?

रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश की पहली परमाणु बिजली परियोजना है। इसे रूस की तकनीकी सहायता से विकसित किया जा रहा है। परियोजना में दो रिएक्टर हैं और दोनों की संयुक्त क्षमता करीब 2,400 मेगावाट है।

परमाणु संयंत्र के संचालन के लिए निर्धारित परमाणु ईंधन की नियमित आपूर्ति जरूरी होती है। इसी वजह से ईंधन की खेप की आवाजाही परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है।

रूपपुर की पहली यूनिट के लिए शुरुआती परमाणु ईंधन की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी है। अब आगे की ईंधन आपूर्ति परियोजना के अगले चरण के लिए आवश्यक है।

क्या पाकिस्तान ने जानबूझकर रोकी उड़ान?

एयरस्पेस मंजूरी न मिलने की खबर सामने आने के बाद इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि पाकिस्तान ने राजनीतिक कारणों से उड़ान रोकी।

बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने भी कहा था कि मंजूरी न मिलने का सटीक कारण पता नहीं था। दूसरी ओर, पाकिस्तान की ओर से इसे तकनीकी और प्रक्रियात्मक मुद्दे से जुड़ा बताया गया है। इसलिए फिलहाल घटना को एयरस्पेस क्लीयरेंस से जुड़ी समस्या के रूप में ही देखा जा रहा है।

एक सप्ताह की देरी से बदला कार्यक्रम

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती योजना के तहत ईंधन की कुछ खेप सितंबर के अंत से पहुंचनी थीं। एयरस्पेस क्लीयरेंस की समस्या के बाद कार्यक्रम लगभग एक सप्ताह आगे खिसक गया।अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पहली उड़ान अक्टूबर की शुरुआत में आने की उम्मीद है। इसके बाद कई उड़ानों के जरिए दूसरी यूनिट के लिए आवश्यक ईंधन की आपूर्ति की जाएगी।

फिलहाल परियोजना पर बड़ा असर नहीं

रूस की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक ईंधन की आपूर्ति अक्टूबर से दिसंबर तक जारी रहने वाली है। इसलिए मौजूदा देरी को फिलहाल डिलीवरी शेड्यूल में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

रूपपुर परियोजना के लिए आने वाले महीनों में ईंधन की कई खेप महत्वपूर्ण रहेंगी। ऐसे में अब निगाहें अक्टूबर की पहली डिलीवरी पर हैं। यदि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार उड़ानें संचालित होती हैं, तो परियोजना के लिए आवश्यक ईंधन आपूर्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

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