Thursday, October 8, 2026
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Home मनोरंजनसुशांत की मौत के 6 साल बाद फिर गरमाया मामला, पोस्टमार्टम को लेकर बहन श्वेता के दावे से मचा हड़कंप‘पैर टूटा हुआ था…’ शरीर पर चोट और स्टन गन के कथित इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल, पुराने पोस्टमार्टम निष्कर्षों से अलग नजर आ रही कहानी

सुशांत की मौत के 6 साल बाद फिर गरमाया मामला, पोस्टमार्टम को लेकर बहन श्वेता के दावे से मचा हड़कंप‘पैर टूटा हुआ था…’ शरीर पर चोट और स्टन गन के कथित इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल, पुराने पोस्टमार्टम निष्कर्षों से अलग नजर आ रही कहानी

by Sagar Sharma
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उनके निधन से जुड़े सवाल आज भी चर्चा में आते रहते हैं। अब उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति के एक हालिया बयान के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अभिनेता के शरीर पर कथित चोटों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

श्वेता ने दावा किया है कि उन्हें पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े एक व्यक्ति से कुछ ऐसी जानकारी मिली, जिसने सुशांत की मौत को लेकर उनके मन में पहले से मौजूद सवालों को और गंभीर कर दिया। उनके मुताबिक, सुशांत का पैर टूटा हुआ था और उनकी आंखों पर भी चोट के निशान थे। उन्होंने शरीर पर कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग और स्टन गन के इस्तेमाल की बात भी कही है।

हालांकि, इन दावों को आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। ये बातें श्वेता सिंह कीर्ति द्वारा कही गई हैं और इनका स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।

बहन ने पोस्टमार्टम को लेकर क्या दावा किया?

श्वेता सिंह कीर्ति ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में अपने भाई की मौत से जुड़े कुछ सवालों पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल में उस व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली जिसने सुशांत के पोस्टमार्टम में भूमिका निभाई थी।

श्वेता के अनुसार, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर सुशांत के शरीर पर ऐसी चोटों के बारे में बताया जो सामान्य परिस्थितियों में सवाल खड़े कर सकती हैं। उन्होंने खास तौर पर पैर टूटने और आंखों पर चोट का जिक्र किया।

इसके साथ ही उन्होंने स्टन गन के कथित इस्तेमाल की बात भी कही। इन दावों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर सुशांत की मौत से जुड़े पुराने सवालों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

2020 में सामने आए पोस्टमार्टम निष्कर्ष क्या कहते थे?

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद पोस्टमार्टम कराया गया था। उस समय सार्वजनिक रूप से सामने आए पोस्टमार्टम संबंधी विवरणों में शरीर पर संघर्ष या बाहरी चोटों के स्पष्ट निशान नहीं पाए जाने की बात कही गई थी।

पोस्टमार्टम निष्कर्षों में मौत का कारण फांसी के कारण दम घुटना बताया गया था। रिपोर्ट से जुड़े सार्वजनिक विवरणों में फाउल प्ले के संकेत नहीं मिलने की बात भी सामने आई थी।

यही वजह है कि श्वेता के हालिया दावे पुराने पोस्टमार्टम निष्कर्षों से अलग दिखाई देते हैं। पैर टूटने और आंखों पर चोट जैसे दावों ने इस पुराने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।

स्टन गन के दावे ने भी बढ़ाई चर्चा

सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की थ्योरी सामने आई थीं। इनमें शरीर पर चोट और किसी बाहरी व्यक्ति की संभावित भूमिका जैसे सवाल भी शामिल थे।अब श्वेता द्वारा स्टन गन के कथित इस्तेमाल का जिक्र किए जाने के बाद इन चर्चाओं को फिर हवा मिली है। हालांकि, किसी भी थ्योरी या दावे को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच दस्तावेजों और प्रमाणों की पुष्टि जरूरी है।

श्वेता ने बदले की भावना से दूर रहने की बात कही

अपने बयान में श्वेता ने सिर्फ सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि लोगों से नफरत और बदले की भावना से दूर रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अपने भाई के साथ हुई घटना को लेकर उनके मन में दर्द है, लेकिन वह नकारात्मकता को अपने जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहतीं।

उन्होंने लोगों से प्यार, विश्वास और सकारात्मकता बनाए रखने की बात कही। उनके मुताबिक किसी करीबी व्यक्ति को खोने का दर्द बेहद गहरा होता है, लेकिन उस दर्द को नफरत में बदलना जरूरी नहीं है।

पुराने मामले में फिर क्यों बढ़ी हलचल?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के वर्षों बाद सामने आए इस बयान ने उनके प्रशंसकों और परिवार से जुड़े लोगों के बीच फिर से चर्चा शुरू कर दी है। खास तौर पर पोस्टमार्टम से जुड़े कथित नए दावों ने पुराने निष्कर्षों और वर्तमान दावों के बीच अंतर को सामने ला दिया है।

फिलहाल इन दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा। मामले से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों को ही किसी अंतिम निष्कर्ष का आधार माना जा सकता है।

नोट: इस लेख में चोट, पैर टूटने और स्टन गन से जुड़े बिंदु श्वेता सिंह कीर्ति द्वारा किए गए दावों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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