Thursday, October 8, 2026
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60 साल बाद पितृ पक्ष में बना खास संयोग! शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग पर पितरों के लिए करें ये काम

by Sagar Sharma
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पितृ पक्ष 2026 इस बार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है। पंचांग गणना के अनुसार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से होगी और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। इस बार सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, जिसके कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बताया जा रहा है। इसी दिन गजछाया योग बनने की बात भी कही गई है।

60 साल बाद ग्रहों की विशेष स्थिति का दावा

ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2026 के पितृ पक्ष में ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जिसे करीब 60 वर्ष बाद दोहराया जाने वाला विशेष संयोग बताया जा रहा है। कुछ ज्योतिषीय मतों के अनुसार 1966 के बाद 2026 में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु और शनि की स्थिति में विशेष समानता देखी जा रही है। इसी वजह से इस साल का श्राद्ध पक्ष धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, ग्रहों के इन संयोगों का आध्यात्मिक प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग क्यों खास?

इस बार 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बताया गया है। साथ ही इसी दिन गजछाया योग बनने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या को पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गजछाया योग को भी पितृ कर्म से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पितरों के निमित्त किए गए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।

पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें?

ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करना शुभ माना जाता है। जिन लोगों को अपने पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा बताई जाती है।

इस दिन पितरों के लिए जल अर्पित करना, तर्पण करना, पिंडदान करना और जरूरतमंदों को भोजन या वस्तुओं का दान करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति के अनुसार कर्मकांड की विधि अलग-अलग हो सकती है।

पितृ दोष को लेकर क्या मान्यता है?

हिंदू ज्योतिष में पितृ दोष को कुंडली से जुड़ी एक ज्योतिषीय अवधारणा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पूर्वजों से जुड़े अधूरे कर्म या पारिवारिक बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण को ऐसी मान्यताओं के अनुसार पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, यह कहना कि किसी विशेष योग से सभी पितृ दोष निश्चित रूप से समाप्त हो जाएंगे, एक धार्मिक/ज्योतिषीय दावा है, प्रमाणित तथ्य नहीं।

10 अक्टूबर को क्या कर सकते हैं?

सर्वपितृ अमावस्या पर लोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पितरों का स्मरण कर सकते हैं। तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन और दान जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।

इस बार शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग के संयोग के कारण धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष चर्चा में है। श्रद्धालु अपनी परंपरा, पंचांग और योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, 2026 का पितृ पक्ष धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व वाला समय माना जा रहा है। इस दौरान पूर्वजों का स्मरण, सेवा, दान और परिवार की परंपराओं के अनुसार श्राद्ध कर्म करने पर जोर दिया जाता है।

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