भारत के परमाणु हथियारों के भंडार को लेकर एक नई अमेरिकी विशेषज्ञ रिपोर्ट में बड़ा अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब करीब 190 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं। यह संख्या पाकिस्तान के अनुमानित 170 वॉरहेड से अधिक है और ब्रिटेन के करीब 225 वॉरहेड के काफी करीब पहुंच गई है।
न्यूक्लियर आर्सेनल में भारत की स्थिति हुई मजबूत
भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर रहा है। देश के पास परमाणु क्षमता वाले कई अलग-अलग सिस्टम मौजूद हैं, जिनमें लड़ाकू विमान, जमीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और समुद्र से प्रक्षेपित होने वाली मिसाइलें शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ नई परमाणु-सक्षम प्रणालियां भी विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इनके शामिल होने के बाद भारत की रणनीतिक क्षमता और मजबूत हो सकती है।
पाकिस्तान से आगे निकला भारत
मौजूदा अनुमान के अनुसार भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड हैं, जबकि पाकिस्तान के पास लगभग 170 वॉरहेड होने का अनुमान है। इस आकलन के आधार पर भारत पाकिस्तान से करीब 20 वॉरहेड आगे है।
हालांकि, भारत अपने परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं करता। इसलिए उपलब्ध आंकड़े सार्वजनिक जानकारी और विशेषज्ञ आकलनों पर आधारित अनुमान हैं।
ब्रिटेन के परमाणु भंडार के बेहद करीब
ब्रिटेन के पास करीब 225 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। इस लिहाज से भारत का अनुमानित 190 वॉरहेड का भंडार ब्रिटेन से करीब 35 वॉरहेड पीछे है।
भारत जिस तेजी से अपनी परमाणु क्षमता और डिलीवरी सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में यह अंतर और कम हो सकता है। हालांकि, फिलहाल भारत ने ब्रिटेन को पीछे नहीं छोड़ा है।
हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का बड़ा भंडार
विशेषज्ञ आकलनों में भारत के पास करीब 730 किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम होने की बात कही गई है। इस मात्रा से सैद्धांतिक रूप से बड़ी संख्या में परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं।
हालांकि, उपलब्ध प्लूटोनियम की पूरी मात्रा का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया गया हो, ऐसा जरूरी नहीं है। परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या कई तकनीकी और रणनीतिक कारकों पर निर्भर करती है।
समुद्र से जवाबी हमला करने की क्षमता मजबूत
भारत अपनी परमाणु क्षमता को जमीन और हवा के साथ-साथ समुद्र तक भी मजबूत कर रहा है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
समुद्र आधारित परमाणु क्षमता किसी देश की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करती है। यही वजह है कि भारत अपनी समुद्री परमाणु क्षमता के विस्तार पर लगातार जोर दे रहा है।
नो फर्स्ट यूज नीति पर भारत का जोर
भारत लंबे समय से नो फर्स्ट यूज (NFU) नीति की बात करता रहा है। इसका अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति रखता है और परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखने पर जोर देता है।
साथ ही, भारत अपनी रणनीतिक क्षमताओं को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया भी जारी रखे हुए है।
परमाणु ताकत में दुनिया के बड़े देश सबसे आगे
परमाणु हथियारों की कुल संख्या के मामले में अमेरिका और रूस दुनिया में सबसे आगे हैं। इनके बाद चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसी परमाणु शक्तियां आती हैं। भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया भी परमाणु हथियार रखने वाले देशों में शामिल हैं।
दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियों के बीच हथियारों और मिसाइल प्रणालियों के आधुनिकीकरण का दौर जारी है। ऐसे समय में भारत के परमाणु भंडार से जुड़ा यह अनुमान रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई विशेषज्ञ रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं। इस आंकड़े के आधार पर भारत पाकिस्तान से आगे है और ब्रिटेन के अनुमानित 225 वॉरहेड के करीब पहुंच गया है। हालांकि, फिलहाल ब्रिटेन भारत से आगे है। भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता में नए मिसाइल सिस्टम, समुद्र आधारित प्लेटफॉर्म और हथियारों का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
