Saturday, September 12, 2026
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हवाई यात्रा पर बढ़ा खर्च का दबाव, सितंबर में फिर महंगा हुआ जेट फ्यूल

by Sagar Sharma
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सितंबर की शुरुआत हवाई यात्रियों के लिए राहत वाली नहीं रही। घरेलू एयरलाइंस के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। 1 सितंबर 2026 से ATF के दाम में 5.46 प्रतिशत, यानी 6.28 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसके साथ घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमत 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब ATF के दाम बढ़ाए गए हैं।

अगस्त के बाद सितंबर में भी बढ़े दाम

इससे पहले 1 अगस्त को भी ATF की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। यानी दो महीने में जेट फ्यूल की कीमत में कुल 11.28 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी से एयरलाइंस की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

तेल कंपनियां आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को ATF और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों और विदेशी मुद्रा दरों जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है।

एयरलाइंस की लागत क्यों बढ़ेगी?

किसी एयरलाइन के लिए ईंधन सबसे महत्वपूर्ण परिचालन खर्चों में से एक है। भारत में ATF का हिस्सा एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है। ऐसे में जेट फ्यूल के दाम बढ़ने का सीधा असर एयरलाइंस के खर्च पर पड़ता है।

एयरलाइंस के सामने ऐसी स्थिति में कई विकल्प होते हैं। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकती हैं, परिचालन खर्च कम करने की कोशिश कर सकती हैं या परिस्थितियों के अनुसार टिकट की कीमतों में बदलाव कर सकती हैं।

क्या अब महंगी हो जाएंगी फ्लाइट टिकट?

ATF महंगा होने के बाद यात्रियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फ्लाइट टिकट भी महंगे होंगे। हालांकि, जेट फ्यूल की कीमत बढ़ना टिकट महंगा होने की गारंटी नहीं है। हवाई किराए पर ईंधन के अलावा यात्री मांग, सीटों की उपलब्धता, एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा और रूट की क्षमता जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।

लेकिन अगर ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है, तो एयरलाइंस पर किराए बढ़ाने का दबाव जरूर बन सकता है। खासकर उन रूट्स पर जहां यात्रियों की मांग पहले से मजबूत है, कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा किराए में शामिल करने पर विचार कर सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार का भी असर

ATF की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इससे जेट फ्यूल समेत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

यात्रियों को क्या करना चाहिए?

सितंबर में अगर आप फ्लाइट से यात्रा की योजना बना रहे हैं तो टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग एयरलाइंस और तारीखों का किराया जरूर जांचना फायदेमंद रहेगा। जरूरी नहीं कि हर रूट पर ATF बढ़ोतरी का असर तुरंत टिकट की कीमत में दिखाई दे।

फिलहाल सितंबर की शुरुआत में ATF का लगातार दूसरा मासिक इजाफा एयरलाइन कंपनियों के लिए लागत का नया दबाव लेकर आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को किस तरह संभालती हैं और इसका असर यात्रियों के हवाई किराए पर कितना पड़ता है।

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