Sunday, September 13, 2026
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बीजिंग में अजीत डोभाल की बड़ी बैठक, सीमा पर शांति और रिश्तों को मजबूत करने पर जोर

by Sagar Sharma
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भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। दोनों के बीच भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब डोभाल चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं और भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं। डोभाल इस वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि हैं, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।

सीमा पर शांति को बताया अहम आधार

अजीत डोभाल और हान झेंग की बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। भारतीय पक्ष लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों में आगे की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने के लिए पिछले कुछ समय में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संवाद जारी रहा है।

चीनी उपराष्ट्रपति ने दोनों देशों के संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, हान झेंग ने रणनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाने, मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और सहयोग की संभावनाओं को तलाशने की बात कही।

आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों पर भी हुई चर्चा

बैठक का एजेंडा सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों ने आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सीमा पर स्थिरता जरूरी है।

अजीत डोभाल ने भी कहा कि भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों देशों के बीच पारस्परिक लाभ वाले सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। साथ ही सीमा से जुड़े सवालों को उचित तरीके से हल करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

वांग यी के साथ भी अहम बातचीत

हान झेंग से मुलाकात के बाद अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई। यह इस प्रक्रिया का 25वां दौर है। बातचीत में सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा केंद्रित रही।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है और 2020 के बाद संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने संवाद के जरिए स्थिति को संभालने और सीमा पर तनाव कम करने की कोशिश की है। इसी क्रम में उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला भी जारी है।

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले बढ़ी अहमियत

डोभाल का चीन दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत-चीन कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS सम्मेलन के लिए भारत आने की संभावना भी जताई जा रही है।

ऐसे में डोभाल की बातचीत को दोनों देशों के बीच संवाद का माहौल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, सीमा विवाद, अरुणाचल प्रदेश और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी मौजूद हैं।

कुल मिलाकर, अजीत डोभाल और हान झेंग की बैठक भारत-चीन संबंधों में संवाद को आगे बढ़ाने का संकेत देती है। सीमा पर शांति बनाए रखना और लंबित विवादों को बातचीत के जरिए संभालना आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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