कनाडा और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड टेंशन अब एक बार फिर बड़े टकराव में बदल गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता को फिलहाल रोकने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि अगर अमेरिका कनाडाई सामान पर टैरिफ लगाता है तो कनाडा भी उसका जवाब “डॉलर के बदले डॉलर” के आधार पर देगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के अधिकारी एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब बताए जा रहे थे।
आखिरी दौर की बातचीत के बाद बिगड़ी बात
कनाडा और अमेरिका के बीच पिछले कई हफ्तों से व्यापारिक मुद्दों को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। 18 अगस्त को दोनों देशों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति की बात सामने आई थी और अमेरिका ने कनाडा के कुछ सामान पर प्रस्तावित 50 प्रतिशत टैरिफ को 21 अगस्त तक टाल दिया था। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उस समय कहा था कि समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है, हालांकि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी बाकी हैं।
लेकिन अंतिम चरण में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। कार्नी के मुताबिक, बातचीत में हुई प्रगति कनाडा के नागरिकों और कारोबारियों के हितों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी वार्ता टीम के साथ आगे की बातचीत को निलंबित करने और कनाडा के वार्ताकारों को वापस बुलाने का फैसला किया।
अमेरिका ने कनाडाई सामान पर लगाया 50% टैरिफ
ट्रेड वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, यह शुल्क कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है। प्रभावित उत्पादों में हॉकी स्टिक, सीमेंट, फर्नीचर, डेयरी और अन्य सामान शामिल हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कनाडा ने प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार किया। वहीं कनाडा का आरोप है कि अमेरिका ने आखिरी समय में ऐसी शर्तें और बदलाव सामने रखे, जिन्हें ओटावा अपने आर्थिक हितों के लिए स्वीकार नहीं कर सकता था।
कार्नी का सख्त संदेश- हर डॉलर का देंगे जवाब
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के कदम के जवाब में बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का “डॉलर फॉर डॉलर” जवाब देगा। यानी अमेरिका जितने मूल्य के कनाडाई सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाएगा, कनाडा भी अमेरिकी उत्पादों पर उतने ही मूल्य के जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी करेगा।
कार्नी ने कहा कि कनाडा का उद्देश्य अपने श्रमिकों, कारोबारियों और अर्थव्यवस्था की रक्षा करना है। कनाडा पहले भी अमेरिकी टैरिफ के जवाब में कई क्षेत्रों में जवाबी शुल्क लगा चुका है और सरकार ने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया है।
बढ़ सकता है उत्तर अमेरिकी ट्रेड वॉर
कनाडा और अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच रोजाना बड़ी मात्रा में वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार होता है। इसलिए टैरिफ की नई लड़ाई का असर केवल दोनों देशों के निर्यातकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि कंपनियों, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह विवाद आगे चलकर व्यापक ट्रेड वॉर का रूप ले सकता है। इससे ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमिनियम, कृषि और अन्य उद्योगों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। साथ ही, अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते यानी CUSMA के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल कनाडा ने बातचीत रोककर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या दोनों देश टैरिफ के बढ़ते दबाव के बीच दोबारा बातचीत की मेज पर लौटते हैं या फिर दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में से एक और ज्यादा तनावपूर्ण दौर में प्रवेश करता है।
