Saturday, September 12, 2026
Saturday, September 12, 2026
Home Uncategorizedपिता की मौत के बाद कर्मचारी को एक महीने की छुट्टी, कंपनी ने मेडिकल खर्च का 20% भी उठाया

पिता की मौत के बाद कर्मचारी को एक महीने की छुट्टी, कंपनी ने मेडिकल खर्च का 20% भी उठाया

by Sagar Sharma
0 comments

कोयंबटूर की 50 साल से अधिक पुरानी कंपनी की दरियादिली की जमकर हो रही तारीफ, चेयरमैन ने खुद कर्मचारी से किया संपर्क

बेंगलुरु के एक उद्यमी ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन के नियोक्ता की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया कि पिता के निधन के बाद उनकी बहन की कंपनी ने न सिर्फ उन्हें एक महीने से अधिक की छुट्टी दी, बल्कि उनके पिता के इलाज पर हुए मेडिकल खर्च का 20 प्रतिशत भी वहन किया। इतना ही नहीं, कंपनी के चेयरमैन ने व्यक्तिगत रूप से कर्मचारी को संदेश भेजकर उनका हालचाल जाना

उद्यमी विबिन बाबूराजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस घटना की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने बताया कि उनकी बहन जिस कंपनी में काम करती हैं, वह कोयंबटूर से संचालित होने वाली एक पारंपरिक कंपनी है।

बाबूराजन के मुताबिक, पिछले सप्ताह उनकी बहन ने अपने पिता को खो दिया। इस मुश्किल समय में कंपनी ने उनका साथ देते हुए चार सप्ताह से अधिक की छुट्टी दी, ताकि वह परिवार के साथ रह सकें और पिता के निधन के बाद की जरूरी जिम्मेदारियां पूरी कर सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने उनके पिता के इलाज के दौरान हुए मेडिकल खर्च का 20 प्रतिशत अपनी ओर से दिया। इसके अलावा कंपनी के चेयरमैन ने खुद कर्मचारी को मैसेज कर उनकी स्थिति के बारे में पूछा और इस मुश्किल समय में उनके प्रति संवेदना व्यक्त की।

विबिन बाबूराजन ने बताया कि यह कंपनी कोई छोटी संस्था नहीं है। कंपनी का इतिहास 50 साल से अधिक पुराना है और इसके 4,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। इसके अलावा कंपनी 40 से अधिक देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है।

उन्होंने पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनियों और कर्मचारियों के बीच बने व्यक्तिगत संबंधों की सराहना करते हुए लिखा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि कुछ पुराने कारोबारी संस्थानों में कर्मचारियों को सिर्फ एक कर्मचारी के तौर पर नहीं देखा जाता। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि शायद यही वजह थी कि उनके माता-पिता अपने नियोक्ताओं के प्रति इतने वफादार रहे।

सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के सामने आने के बाद लोगों ने भी कंपनी के इस व्यवहार की तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि किसी कर्मचारी के जीवन के सबसे कठिन दौर में कंपनी का इस तरह साथ खड़ा होना वास्तव में सराहनीय है।

एक यूजर ने लिखा कि यह जानकर वह काफी प्रभावित हुए कि नियोक्ता वास्तव में अपने कर्मचारी की परवाह करता है। वहीं, एक अन्य यूजर ने अपने करीब 16 वर्षों के कॉर्पोरेट अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उनके अनुसार पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनियां तथाकथित प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनियों से बेहतर हो सकती

एक अन्य यूजर ने कहा कि परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों को अक्सर ‘लाला कंपनी’ कहकर उनका मजाक उड़ाया जाता है, लेकिन उन्होंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां मालिक मुश्किल समय में अपने कर्मचारियों की मदद के लिए आगे आए।

कुछ लोगों ने इस पोस्ट को पुराने कॉर्पोरेट दौर से भी जोड़ा। एक यूजर ने याद किया कि पहले बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों को पेंशन, सस्ते गेस्ट हाउस और साधारण लेकिन सुविधाजनक कैंटीन जैसी सुविधाएं मिलती थीं। उनके मुताबिक, आज के दौर में कंपनियों के शानदार ऑफिस और दूसरी सुविधाओं के बावजूद बड़े पैमाने पर होने वाली छंटनी ने कर्मचारी और नियोक्ता के रिश्ते को काफी बदल दिया है।

कंपनी की पहचान भले ही सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि मुश्किल समय में कर्मचारियों के प्रति किसी संगठन का मानवीय रवैया कितना महत्वपूर्ण होता है।

Author

You may also like