Saturday, September 12, 2026
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10 साल के बच्चे ने बनाया ‘AI इलेक्ट्रॉनिक नोज’, एयरपोर्ट पर ड्रग्स और बीमारी का लगाएगा पता

by Sagar Sharma
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तकनीक की दुनिया में अक्सर बड़े वैज्ञानिकों और अनुभवी इंजीनियरों के आविष्कार सुर्खियां बनते हैं, लेकिन इस बार एक 10 साल के बच्चे ने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। ताइवान के छात्र ह्सू टिंग-वेई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर आधारित एक ऐसा ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज’ तैयार किया है, जो हवा में मौजूद रासायनिक संकेतों का विश्लेषण कर संभावित खतरनाक पदार्थों की पहचान करने में मदद कर सकता है।

इस आविष्कार को खास तौर पर एयरपोर्ट सुरक्षा और जैव-सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह सिस्टम एक्स-रे बैगेज स्कैनर के पीछे हवा के नमूने लेकर उनमें मौजूद विशिष्ट रासायनिक संकेतों को पहचानने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य सामान को केवल एक्स-रे तस्वीरों के आधार पर जांचने के बजाय उसमें मौजूद पदार्थों के संभावित ‘गंध संकेतों’ का भी विश्लेषण करना है।

कैसे काम करता है AI का ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज’?

इलेक्ट्रॉनिक नोज का मूल विचार इंसानी सूंघने की क्षमता की नकल करना है। इंसान की नाक अलग-अलग गंधों को पहचानती है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सेंसर और डेटा प्रोसेसिंग की मदद से हवा में मौजूद रासायनिक पैटर्न को रिकॉर्ड करता है। AI इन पैटर्न को पहले से उपलब्ध डेटा से मिलाकर संभावित पदार्थ की पहचान में सहायता कर सकता है।

टिंग-वेई का प्रोजेक्ट इसी अवधारणा को सुरक्षा जांच के क्षेत्र में इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। संभावित तौर पर ऐसी तकनीक उन स्थितियों में उपयोगी हो सकती है जहां किसी पदार्थ की पहचान केवल उसकी पैकेजिंग या एक्स-रे इमेज से करना मुश्किल हो।

ड्रग्स के साथ बीमारी का भी पता लगाने की कोशिश

इस आविष्कार की एक और खास बात इसका संभावित जैव-सुरक्षा उपयोग है। रिपोर्टों के अनुसार, सिस्टम को ड्रग्स के अलावा अफ्रीकन स्वाइन फीवर जैसे खतरों से जुड़े संकेतों की पहचान के लिए भी डिजाइन किया गया है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूअरों में फैलने वाली गंभीर बीमारी है, इसलिए इसके प्रसार को रोकने के लिए शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस तरह की AI तकनीक को किसी बीमारी या ड्रग्स की अंतिम और चिकित्सकीय/कानूनी पुष्टि करने वाली जांच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल संभावित खतरे का शुरुआती संकेत देने और आगे की जांच के लिए संदिग्ध वस्तु या क्षेत्र को चिन्हित करने में अधिक उपयोगी हो सकता है।

10 साल की उम्र में मिला बड़ा सम्मान

ह्सू टिंग-वेई का आविष्कार 2026 के Silicon Valley International Festival (SVIIF) में चर्चा का केंद्र बना। उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए गोल्ड मेडल के साथ Best Invention Award भी मिला। ताइवान की टीम ने प्रतियोगिता में कुल 24 गोल्ड मेडल समेत कई अन्य सम्मान हासिल किए।

इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि निर्णायकों ने इसे केवल एक बच्चे की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाला पुरस्कार नहीं माना, बल्कि आविष्कार की वास्तविक उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं को भी महत्व दिया।

एयरपोर्ट सुरक्षा का बदल सकता है तरीका

अगर ऐसी तकनीक बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक विकसित और प्रमाणित होती है, तो भविष्य में एयरपोर्ट सुरक्षा में इसका इस्तेमाल एक्स-रे स्कैनिंग जैसी मौजूदा तकनीकों के साथ किया जा सकता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध सामान की पहचान के लिए एक अतिरिक्त डेटा स्रोत मिल सकता है।

10 वर्षीय टिंग-वेई का यह आविष्कार यह भी दिखाता है कि नई तकनीक विकसित करने के लिए उम्र हमेशा बाधा नहीं होती। AI, सेंसर और वैज्ञानिक सोच का इस्तेमाल करके बच्चे भी ऐसी समस्याओं के समाधान खोज सकते हैं जिनका असर भविष्य में सुरक्षा, स्वास्थ्य और जैव-सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

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