28 सितंबर 2026: UPI Payment को लेकर चल रहे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Merchant UPI Transactions पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है, हालांकि केंद्र सरकार, RBI और NPCI से इस मामले में जवाब मांगा गया है।
सबसे पहले समझिए—क्या हर UPI Payment पर लगेगा चार्ज?
नए नियम को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात पर है कि क्या अब ₹2,000 से ज्यादा का हर UPI Payment करने पर ग्राहक को अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। ऐसा नहीं है।
₹2,000 तक के Merchant Transactions को भी MDR से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
बड़े Merchant Payments पर MDR की व्यवस्था
प्रस्तावित Framework के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Merchant UPI Payments पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे Transactions पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति Transaction रखी गई है।
यहां MDR का मतलब उस शुल्क से है जो Payment Ecosystem में Merchant Transaction को Process करने से जुड़ा होता है। इसे सीधे ग्राहक के UPI खाते से काटे जाने वाले शुल्क के रूप में समझना सही नहीं होगा।
छोटे दुकानदारों पर क्या होगा असर?
UPI का इस्तेमाल छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े व्यवसायों तक बड़े पैमाने पर होता है। नए Framework में छोटे Merchants के लिए Zero-MDR व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा ₹2,000 तक के Merchant Transactions पर MDR नहीं लगाया जाएगा। इससे रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतानों पर प्रस्तावित बदलाव का सीधा प्रभाव सीमित रहने की बात कही गई है।
कुछ क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था
कुछ Essential और Thin-Margin Sectors के लिए अलग MDR व्यवस्था प्रस्तावित है। इनमें रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि से जुड़े कुछ भुगतान शामिल हैं।
ऐसे मामलों में ₹2,000 से अधिक के Transactions पर 0.4 प्रतिशत के बजाय ₹5 का Flat MDR प्रस्तावित किया गया है।
वहीं Mutual Funds, Securities और Stockbrokers या Dealers से जुड़े Transactions के लिए अलग दर निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं लगाई रोक?
इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में MDR Framework की वैधानिकता और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार, RBI और NPCI को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।इसका मतलब है कि मामला अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन है और आगे होने वाली सुनवाई में व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
आम UPI यूजर को कितना फर्क पड़ेगा?
आम यूजर के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ₹2,000 से ज्यादा का हर UPI Payment ग्राहक के लिए चार्जेबल नहीं होगा।अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजता है, तो उस पर इस MDR व्यवस्था का असर नहीं है। इसी तरह ₹2,000 तक के Merchant Payments पर भी प्रस्तावित MDR नहीं लगाया जाएगा।
बड़े Merchant Transactions के मामले में MDR Payment Ecosystem के स्तर पर लागू होने की व्यवस्था है। इसलिए ग्राहकों को इसे सीधे UPI Transfer Fee के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित बदलाव पर नजर
प्रस्तावित Framework को 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत ने फिलहाल रोक नहीं लगाई है।
आगे की सुनवाई में केंद्र सरकार, RBI और NPCI का पक्ष सामने आने के बाद इस व्यवस्था को लेकर कानूनी स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल UPI Users के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ₹2,000 से ऊपर के हर भुगतान पर सीधे ग्राहक से अतिरिक्त चार्ज लगाए जाने की बात नहीं है।
