राइड बुकिंग के बीच क्यों उठेCCPA की जांच में सामने आया कि ऐप पर पहले ग्राहक को एक किराया दिखाया जाता था। इसके बाद जब राइड बुक करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी, तो कुछ स्थितियों में ग्राहक को अधिक रकम जोड़ने के लिए कहा जाता था।ऐप पर ऐसे संदेश दिखाई देने की बात सामने आई, जिनका अर्थ था कि ज्यादा कीमत देने पर राइड मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कुछ मामलों में ग्राहक को यह भी बताया जाता था कि ड्राइवर मौजूदा कीमत पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं और रकम बढ़ाने का विकल्प दिया जाता था।प्राधिकरण के अनुसार, ऐसी स्थिति ग्राहक पर अतिरिक्त भुगतान करने का दबाव बना सकती है।
‘डार्क पैटर्न’ को लेकर क्या पाया गया?
CCPA ने इस मामले में डिजिटल इंटरफेस से जुड़ी दो प्रथाओं को महत्वपूर्ण माना—‘कन्फर्म शेमिंग’ और ‘इंटरफेस इंटरफेरेंस’।कन्फर्म शेमिंग का मतलब ऐसी डिजाइन या भाषा से है, जिसमें ग्राहक को किसी विकल्प को स्वीकार करने या अतिरिक्त भुगतान करने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस हो सकता है। वहीं इंटरफेस इंटरफेरेंस में ऐप की डिजाइन, रंग, बटन या विकल्पों की व्यवस्था इस तरह हो सकती है कि उपयोगकर्ता किसी खास विकल्प की ओर ज्यादा आकर्षित हो।प्राधिकरण ने माना कि राइड बुकिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए ऐसे तरीके उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
प्राधिकरण ने माना कि राइड बुकिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए ऐसे तरीके उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
ज्यादा भुगतान करने पर राइड मिलने का दावा
जांच के दौरान ऐप में ऐसे संदेशों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें अधिक कीमत देने को राइड मिलने की बेहतर संभावना से जोड़ा गया था।CCPA के अनुसार, ग्राहक द्वारा राइड बुक करने के बाद इस तरह का अतिरिक्त भुगतान विकल्प सामने आना भ्रम पैदा कर सकता है। खासकर तब, जब ग्राहक पहले ही एक किराया स्वीकार करके बुकिंग की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका हो।प्राधिकरण ने यह भी माना कि ग्राहक को यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किराया दे रहा है या स्वैच्छिक टिप।
टिप और किराए के बीच अंतर पर भी जोर
CCPA ने कहा कि टिप सामान्य तौर पर सेवा मिलने के बाद ग्राहक की इच्छा से दी जाने वाली राशि होती है। इसे सेवा प्राप्त करने की शर्त के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।राइड शुरू होने से पहले अतिरिक्त रकम देने के लिए प्रेरित करने वाली व्यवस्था को लेकर इसी वजह से सवाल उठाए गए। उपभोक्ता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उसे यात्रा के लिए कितना किराया देना है और कौन-सी राशि वैकल्पिक है।
कंपनी पर ₹10 लाख की कार्रवाई
इन निष्कर्षों के आधार पर CCPA ने रैपिडो का संचालन करने वाली कंपनी पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही उसे ऐसे भ्रामक प्रॉम्प्ट और ऐसी प्रक्रियाओं को बंद करने का निर्देश दिया गया है, जो ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा भुगतान करने की ओर ले जा सकती हैं।यह कार्रवाई राइड-हेलिंग और बाइक-टैक्सी प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता अधिकारों तथा डिजिटल इंटरफेस की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती निगरानी के बीच हुई है।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
इस कार्रवाई का सीधा असर राइड बुक करने के अनुभव पर पड़ सकता है। ग्राहकों के लिए किराया, वैकल्पिक भुगतान और टिप के बीच अंतर स्पष्ट रखना जरूरी होगा।यदि किसी ऐप पर राइड कन्फर्म कराने के नाम पर अतिरिक्त राशि मांगी जाती है, तो ग्राहक को भुगतान से पहले यह देखना चाहिए कि वह राशि अनिवार्य किराए का हिस्सा है या वैकल्पिक भुगतान।डिजिटल सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐप का डिजाइन और भाषा भी उपभोक्ता के आर्थिक फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
