Thursday, October 8, 2026
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भारत में युवा प्रदर्शनों पर चीन की प्रतिक्रिया, कुछ टिप्पणीकारों ने मोदी सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

by Sagar Sharma
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भारत में हाल के दिनों में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर चीन में भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ चीनी टिप्पणीकारों और शोधकर्ताओं ने इन प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और शासन से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा है। वहीं चीन के प्रमुख सरकारी मीडिया संस्थानों ने इस विषय पर अपेक्षाकृत सीमित और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की

रिपोर्टों के अनुसार, चीन की फुदान यूनिवर्सिटी से जुड़े एक शोधकर्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हालिया घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है। उनके अनुसार, शिक्षित युवाओं के लिए पर्याप्त अवसरों की कमी और रोजगार संबंधी चिंताओं ने असंतोष को बढ़ावा दिया है।

भारत में यह विरोध प्रदर्शन नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ शुरू हुआ था। आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नामक समूह ने किया। बाद में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिए गए।

चीनी वेबसाइट गुआनचा.सीएन पर प्रकाशित विश्लेषणों में दावा किया गया कि युवाओं का यह आंदोलन केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे शासन और रोजगार जैसे बड़े मुद्दों पर भी चर्चा तेज हुई। वहीं कुछ अन्य टिप्पणियों में भारत सरकार की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया गया।

दूसरी ओर, चीन के सरकारी मीडिया जैसे शिन्हुआ और सीसीटीवी ने इस विषय पर अपेक्षाकृत कम कवरेज दी। सरकारी अंग्रेज़ी अखबार चाइना डेली और ग्लोबल टाइम्स ने मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े घटनाक्रम की संक्षिप्त समाचार रिपोर्टें प्रकाशित कीं, जबकि विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण से दूरी बनाए रखी।

चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर भी इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने भारत की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपनी राय व्यक्त की, जबकि कुछ ने इसे शासन और सार्वजनिक नीतियों पर बहस का विषय बताया।

विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी देश में होने वाले बड़े जन आंदोलनों को विदेशी मीडिया और टिप्पणीकार अक्सर अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। ऐसे में भारत में हुए हालिया युवा प्रदर्शनों को लेकर चीन के विभिन्न मंचों पर सामने आई प्रतिक्रियाएं भी उसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा मानी जा रही हैं।

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