भारतीय क्रिकेट में अजीत अगरकर के कार्यकाल से जुड़ी एक पुरानी घटना इन दिनों फिर चर्चा में है। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अगरकर और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बीच मतभेदों की शुरुआत उनके मुख्य चयनकर्ता बनने के कुछ समय बाद ही हो गई थी। मामला 2023 में आयरलैंड दौरे के लिए जसप्रीत बुमराह को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपने से जुड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, अगरकर बुमराह को कप्तान बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे और उनकी जगह ऋतुराज गायकवाड़ को नेतृत्व देने का समर्थन कर रहे थे।
बुमराह लंबे ब्रेक के बाद कर रहे थे वापसी
अगस्त 2023 में भारतीय टीम को आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेलनी थी। उस समय बुमराह लगभग एक साल तक चोट के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद वापसी कर रहे थे।
ऐसे में चयन समिति के सामने उनकी फिटनेस और वर्कलोड को लेकर भी सवाल था। रिपोर्ट के मुताबिक, अगरकर का विचार था कि लंबे अंतराल के बाद वापसी कर रहे बुमराह पर कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने के बजाय उन्हें अपनी गेंदबाजी और फिटनेस पर ध्यान देने का मौका दिया जाना चाहिए।
अगरकर चाहते थे ऋतुराज को मिले जिम्मेदारी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगरकर की पसंद ऋतुराज गायकवाड़ थे। उस समय ऋतुराज को एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का कप्तान भी बनाया गया था। इसलिए उन्हें आयरलैंड दौरे पर भी नेतृत्व की जिम्मेदारी देने का विकल्प सामने था।
हालांकि, बुमराह खुद लंबे समय बाद वापसी कर रहे थे और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार थे। अंततः बोर्ड की प्राथमिकता बुमराह को कप्तानी सौंपने की रही और चयन समिति के भीतर इस मुद्दे पर असहमति के बावजूद उन्हें आयरलैंड दौरे की कमान मिली।
बुमराह की कप्तानी में भारत ने जीती सीरीज
आयरलैंड दौरे पर बुमराह की कप्तानी में भारतीय टीम ने तीन मैचों की टी20 सीरीज 2-0 से अपने नाम की थी। सीरीज का एक मुकाबला बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका था।
बुमराह के लिए यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह उनकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी का चरण था। उन्होंने कप्तानी के साथ गेंदबाजी की जिम्मेदारी भी संभाली और इसके बाद भारतीय टीम के महत्वपूर्ण तेज गेंदबाज के रूप में उनकी भूमिका लगातार बनी रही।
बाद में टेस्ट कप्तानी पर भी हुई चर्चा
बुमराह की कप्तानी का मुद्दा बाद के वर्षों में भी चर्चा में रहा। 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की और अपने नेतृत्व से प्रभावित किया। हालांकि 2025 में इंग्लैंड दौरे के लिए उन्हें टेस्ट कप्तान नहीं बनाया गया
उस समय अगरकर ने स्पष्ट किया था कि बुमराह के मामले में मुख्य चिंता उनका वर्कलोड और फिटनेस थी। चयनकर्ताओं का मानना था कि एक तेज गेंदबाज पर कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने से उसके कार्यभार पर असर पड़ सकता है।
पुराना मामला फिर क्यों आया चर्चा में?
अगरकर के मुख्य चयनकर्ता के रूप में भविष्य को लेकर 2026 में चर्चा तेज होने के बीच 2023 की यह घटना फिर सामने आई है। रिपोर्टों में उनके और बोर्ड के बीच कई मुद्दों पर मतभेदों का जिक्र किया गया है। हालांकि, बुमराह की कप्तानी वाला मामला उसी दौर की एक चयन-संबंधी असहमति के रूप में सामने आया है।
यह घटना भारतीय क्रिकेट में कप्तानी और चयन से जुड़े फैसलों की जटिलता को भी सामने लाती है। एक तरफ खिलाड़ी की फिटनेस और वर्कलोड जैसे पहलू होते हैं, तो दूसरी तरफ टीम की तत्काल जरूरत और नेतृत्व के विकल्पों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। 2023 में अंततः बुमराह को कप्तानी मिली और उन्होंने उस दौरे पर टीम का नेतृत्व किया।
