Wednesday, October 28, 2026
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मां कालरात्रि की महिमा:नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना से दूर होंगे भय और संकट, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती

by Sagar Sharma
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नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और उग्र माना जाता है, लेकिन वे अपने भक्तों के प्रति करुणा और ममता भी रखती हैं। इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा करने, मंत्रों का जाप करने और आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है।

मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व

मां दुर्गा के सातवें स्वरूप का नाम कालरात्रि है। मान्यता है कि उनका स्वरूप दुष्ट शक्तियों का विनाश करने और धर्म की रक्षा करने के लिए प्रकट हुआ। मां का वर्ण अंधकार के समान है, उनके बाल खुले रहते हैं और वे गर्दभ यानी गधे पर सवार रहती हैं। उनके चार हाथों में से दो हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं, जबकि अन्य दो हाथ भक्तों को अभय और वरदान देने की मुद्रा में रहते हैं।

मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। उनकी पूजा से साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके मां दुर्गा और मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं और मां को फूल, अक्षत, धूप तथा नैवेद्य अर्पित करें।

मां कालरात्रि को लाल रंग के फूल विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। पूजा के दौरान मां का ध्यान करते हुए दुर्गा सप्तशती या मां कालरात्रि से संबंधित स्तुति का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद मंत्र का जाप करें और अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती उतारें।

पूजा करते समय मन को शांत रखें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें।

मां कालरात्रि को क्या लगाएं भोग?

धार्मिक परंपराओं में मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने पकवानों का भोग लगाने की मान्यता प्रचलित है। कुछ स्थानों पर मालपुआ और अन्य पारंपरिक मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं।भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। प्रसाद अर्पित करने के बाद उसे परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है। पूजा में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करना भी उचित है।

मां कालरात्रि का शक्तिशाली मंत्र

मां कालरात्रि की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

इसके अतिरिक्त मां के ध्यान के लिए यह मंत्र भी प्रचलित है:

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्रों का उच्चारण स्पष्टता और एकाग्रता के साथ करना चाहिए।

मां कालरात्रि की आरती

मां की पूजा के अंत में उनकी आरती की जाती है। आरती के लिए यह पारंपरिक पंक्तियां गाई जा सकती हैं:

कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥

आरती के बाद मां से परिवार की रक्षा, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

मां कालरात्रि की पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और अनुशासन का विशेष महत्व है। पूजा सामग्री अपनी सुविधा के अनुसार जुटाएं और किसी भी धार्मिक नियम को लेकर अनावश्यक चिंता न करें। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत के अनुसार खानपान करें।

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना शक्ति, साहस और सकारात्मकता का संदेश देती है। भक्तों के लिए यह दिन अपनी आस्था को मजबूत करने और अच्छे विचारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने का अवसर है।

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