Thursday, October 8, 2026
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7 अक्टूबर की बरसी पर ज़ोहरान ममदानी का बयान बना विवाद की वजह, ‘चुंबन के साथ तमाचा’ टिप्पणी ने बढ़ाई सियासी गर्मी

by Sagar Sharma
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न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी के 7 अक्टूबर 2023 के हमले की तीसरी बरसी पर दिए गए बयान को लेकर अमेरिकी राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। ममदानी ने हमास के हमले में मारे गए इजरायली नागरिकों और बंधक बनाए गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की, लेकिन इसी के साथ गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और वहां पैदा हुए मानवीय संकट का भी जिक्र किया। उनके इस संतुलित लेकिन विवादित रुख पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों से प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

हमले के पीड़ितों को किया याद

ममदानी ने अपने संदेश में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले को बेहद दर्दनाक घटना बताया। उन्होंने हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और बंधक बनाए गए लोगों को भी याद किया। उस हमले में बड़ी संख्या में इजरायली नागरिक मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था।

हालांकि, ममदानी ने अपने बयान को केवल 7 अक्टूबर की घटना तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसके बाद गाजा में हुई घटनाओं और वहां आम नागरिकों को हुई भारी क्षति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संघर्ष में फिलिस्तीनियों की पीड़ा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एक बयान, कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

ममदानी के बयान का सबसे ज्यादा विरोध उन लोगों की ओर से हुआ, जिन्होंने माना कि 7 अक्टूबर की बरसी पर प्राथमिकता हमले के पीड़ितों को याद करने की होनी चाहिए थी। आलोचकों के अनुसार, उसी संदेश में गाजा युद्ध की आलोचना जोड़ने से बयान का फोकस बदल गया।

पूर्व अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने ममदानी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘चुंबन के साथ तमाचा’ जैसा बताया। उनका तर्क था कि ममदानी ने एक तरफ इजरायली पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई, लेकिन दूसरी तरफ उसी बयान में इजरायल की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए।

गाजा का मुद्दा भी उठाया

ममदानी लंबे समय से गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर इजरायल की नीतियों के आलोचक रहे हैं। अपने ताजा संदेश में भी उन्होंने गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों और वहां जारी मानवीय संकट को प्रमुखता से उठाया।

इजरायल की ओर से गाजा में सैन्य अभियान को हमास के खिलाफ कार्रवाई बताया जाता रहा है। इजरायल का कहना है कि अभियान का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करना है, जबकि आलोचक नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव और मानवीय नुकसान को लेकर सवाल उठाते हैं।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ी बहस

ममदानी के बयान के बाद बहस केवल इजरायल समर्थक और फिलिस्तीन समर्थक खेमों तक सीमित नहीं रही। कुछ अमेरिकी राजनीतिक नेताओं और यहूदी संगठनों ने भी उनकी भाषा पर आपत्ति जताई। वहीं, फिलिस्तीन समर्थक समूहों के बीच भी उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

इस विवाद की एक वजह यह भी रही कि ममदानी ने 7 अक्टूबर के पीड़ितों को याद करने के साथ गाजा में फिलिस्तीनियों की स्थिति को भी एक ही संदेश में शामिल किया। समर्थकों का कहना है कि दोनों पक्षों के नागरिकों की पीड़ा को एक साथ स्वीकार करना जरूरी है, जबकि आलोचकों का कहना है कि बरसी के मौके पर ऐसा करना उचित नहीं था।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

ममदानी के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने उनके बयान को दोनों समुदायों के नागरिकों की पीड़ा स्वीकार करने वाला बताया, जबकि आलोचकों ने इसे 7 अक्टूबर की बरसी के संदर्भ से भटकाने वाला संदेश करार दिया।

इस विवाद ने एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर अमेरिका में मौजूद गहरे राजनीतिक मतभेदों को सामने ला दिया है। ममदानी के बयान ने यह बहस भी तेज कर दी है कि 7 अक्टूबर जैसी संवेदनशील तारीख पर राजनीतिक नेताओं को पीड़ितों और संघर्ष के व्यापक मानवीय प्रभाव के बारे में किस तरह बात करनी चाहिए।

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