Thursday, October 8, 2026
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जंग का असर सीमाओं से बाहर! जेलेंस्की का 47 देशों को बड़ा संदेश, पुतिन पर लगाए गंभीर आरोप

by Sagar Sharma
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत समेत 47 देशों का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस अलग-अलग देशों के नागरिकों को अपने युद्ध में शामिल कर रहा है और संबंधित सरकारों को अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का जिक्र

जेलेंस्की ने अपने संबोधन में दावा किया कि रूस के युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने भारत के अलावा घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों का नाम लिया।

उनके अनुसार, इन देशों के कुछ नागरिक रूस पहुंचने के बाद युद्ध से जुड़े और कुछ मामलों में युद्ध के मैदान में उनकी मौत भी हुई। उन्होंने संबंधित देशों की सरकारों से अपने नागरिकों की स्थिति पर ध्यान देने और उन्हें रूस-यूक्रेन संघर्ष में शामिल होने से रोकने की अपील की।

भारतीय नागरिकों को लेकर भी उठाया मुद्दा

रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती का मामला पहले से ही भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। सितंबर 2026 में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया था कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 227 भारतीय नागरिक रूसी सेना में भर्ती हुए थे। इनमें से 139 लोगों को मुक्त किया जा चुका था, जबकि 51 भारतीयों की मौत की जानकारी सामने आई थी।

भारत लगातार रूसी पक्ष के सामने भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई और वापसी का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे में जेलेंस्की का बयान इस मामले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ले आया है।

पुतिन के लिए इस्तेमाल किया ‘पेशेंट जीरो’ शब्द

जेलेंस्की ने अपने भाषण में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ‘पेशेंट जीरो’ शब्द का इस्तेमाल किया। चिकित्सा के संदर्भ में यह शब्द आमतौर पर किसी संक्रमण के शुरुआती मामले के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जेलेंस्की ने इस शब्द के जरिए युद्ध के प्रभाव को यूक्रेन की सीमाओं से बाहर फैलने के अपने दृष्टिकोण को व्यक्त किया।उन्होंने यह भी कहा कि रूस को मिलने वाला आर्थिक समर्थन युद्ध को जारी रखने की क्षमता को प्रभावित करता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में विदेशी नागरिकों की भूमिका

जेलेंस्की का बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में विदेशी नागरिकों की कथित भागीदारी को लेकर कई देशों में चिंता बनी हुई है। अलग-अलग देशों के नागरिकों के रूसी सेना से जुड़ने के मामले सामने आते रहे हैं।

भारत के लिए इस मुद्दे का प्रमुख पहलू अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित वापसी है। भारतीय अधिकारियों की ओर से भी रूसी सेना में शामिल भारतीय नागरिकों के मामलों को लेकर रूसी सरकार के साथ संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आती रही है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। विदेशी नागरिकों की कथित भागीदारी, आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य सहयोग और कूटनीतिक दबाव ने इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।

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