Sunday, November 1, 2026
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रक्षाबंधन पर पंचक को लेकर न हों परेशान, जानें राखी बांधने का सही समय और जरूरी नियम

by Sagar Sharma
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रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख-समृद्धि व लंबी आयु की कामना करती है। वहीं भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेते हुए उसे उपहार देता है। लेकिन जब रक्षाबंधन के दिन पंचक का संयोग बन जाए तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पंचक के दौरान राखी बांधना शुभ होता है या इससे बचना चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही बताई गई है। हालांकि राखी बांधने को पंचक में निषिद्ध कार्यों की सामान्य सूची में नहीं रखा जाता। इसलिए केवल पंचक होने की वजह से रक्षाबंधन का पर्व रोकने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। फिर भी शुभ मुहूर्त में राखी बांधना अधिक अच्छा माना जाता है।

पंचक क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है, उस अवधि को पंचक कहा जाता है। इसकी अवधि लगभग पांच दिनों की होती है। पंचक के दौरान धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों का प्रभाव माना जाता है।

धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि पंचक को लेकर अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं में अंतर भी देखने को मिलता है।

क्या पंचक में राखी बांध सकते हैं?

रक्षाबंधन के दिन पंचक पड़ने पर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बहन अपने भाई को राखी बांधे या नहीं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राखी बांधना पंचक में वर्जित कार्यों में शामिल नहीं है। इसलिए पंचक के कारण राखी बांधने को अशुभ मानना उचित नहीं है।

रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़ा पर्व है और इस दिन राखी बांधने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में यदि पंचक चल रहा हो, तो भी बहन भाई को राखी बांध सकती है। हालांकि संभव हो तो राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का चयन किया जा सकता है

भद्रा और पंचक में अंतर समझना जरूरी

रक्षाबंधन पर अक्सर पंचक और भद्रा को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है। दोनों अलग-अलग ज्योतिषीय अवधारणाएं हैं। रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए भद्रा काल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की परंपरा रही है। कई धार्मिक मान्यताओं में भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

इसलिए यदि रक्षाबंधन के दिन पंचक और भद्रा दोनों में से किसी का प्रभाव हो, तो दोनों की अलग-अलग गणना देखना जरूरी है। केवल पंचक होने के कारण राखी बांधने को टालना आवश्यक नहीं माना जाता।

राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान

राखी बांधते समय भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है। बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाकर अक्षत लगाए और इसके बाद उसकी कलाई पर राखी बांधे।

राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारकर उसकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है। भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसे उपहार देता है।

शुभ मुहूर्त को क्यों दिया जाता है महत्व?

हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य को शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा है। इसलिए रक्षाबंधन पर पंचक होने की स्थिति में भी यदि राखी बांधने के लिए शुभ समय उपलब्ध हो, तो उसी समय को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

हालांकि मुहूर्त और पंचक की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के आधार पर रक्षाबंधन का सही समय देखना उचित रहेगा।

क्या पंचक के कारण रक्षाबंधन टालना चाहिए?

नहीं। सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल पंचक के कारण रक्षाबंधन का पर्व या राखी बांधने की परंपरा रोकने की आवश्यकता नहीं है। पंचक और रक्षाबंधन को लेकर फैले भ्रम को दूर करने के लिए जरूरी है कि पंचक में निषिद्ध कार्यों और राखी बांधने की परंपरा के बीच अंतर समझा जाए।

इसलिए अगर रक्षाबंधन पर पंचक बन रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। भद्रा काल से बचते हुए और स्थानीय पंचांग में दिए शुभ समय को ध्यान में रखकर राखी बांधी जा सकती है। अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं, इसलिए धार्मिक निर्णय के लिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना सबसे उचित रहेगा।

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